☝ अस्तित्व ये कैसा जहाँ नित नारी खोती आबरू है,

हैवानियत जागती है, इंसानियत आंखें बंद सोती है...!
दिल में अरमान होंसले बुलंद,फिर भी अधूरे रह गये,
सपने अपने जो संजोती नारी आंसू बनकर बह गये...!
बाहर भीतर घर आंगन सुरक्षित नहीं कहीं नंही कली,
पापियों की नगरी देखअब तो भारत माता भी है रोती...!
बचाये रखती कोख़ जन्म के बाद हवस से न बच पाती,
नित नये झूंठ,छलावे इंसानियत के नारी न समझ पाई...!
अपनों ने ही लुटा औरों में बांटा,छुपकर घात किया,
लज्जा नारी लुटाती, उसके बाद जान से मार दिया...!
हवस के पुजारी नारी में धर्म जाती कुछ न देखते हैं,
संरक्षक निर्लज अधिकारी तो सबसे पहले नोचते हैं...!
अस्तित्व जगजननी का मिटा दोगे नारी धरा की धार,
मनु का बीज भी नारी ही बोती,नारी जीवन का सार...!
मनु सभी बेशर्म हो गए,परमात्मा का भी ख़ौफ़ नहीं,
दरिंदे बेफिक्र हो घूमते,पैसों में बिकती न्याय की पोथी...!
अनगिनत कलियों की कर दी हत्या सुधर जाओ अभी,
बंधन में न बंध पाओगे ए नर नारी न मिलेगी कभी...!
हाथ जो कहता राहुल नारी का वंश आगे न बढ़ पायेगा,
शर्म करो वहशी दरिदों श्रष्टि का चक्र भी रुक जाएगा...!❤

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एक अपील 🙏🏻🙏🏻

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