कीमत

 पायल हज़ारो रूपये में आती है पैरो में पहना देते हैं,

एक रूपये की बिंदिया आती है माथे पर सजा देते हैं।
कीमत मायने नहीं रखती उसका मान मायने रखता हैं,
किताब घर में गीता और कुरान आपस में नहीं लड़ते हैं।
जो लड़ते हैं वही इंसान लिखे पर अम्ल ही नहीं करते,
बेशक़ कड़वे लगें ज्ञान देने वाले मित्र मगर सच्चे होते हैं।
इतिहास गवाह है आज तक नमक में कीड़े नहीं पड़े हैं।
मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड ही जाया करते हैं,
मीठी तारीफ़ मीठी बातें करने वाले ही खंजर घोपतें हैं,
समझदर के लिये "इशारा" काफी,ज्यादा नहीं सोचते हैं।

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एक अपील 🙏🏻🙏🏻

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