एक अपील 🙏🏻🙏🏻

 एक विनम्र निवेदन:-



दीपावली पर लगभग हर घर में श्री गणेश और लक्ष्मी जी की

नई मूर्तियों की पूजा  होगी..  लेकिन,पुरानी मूर्ति का क्या होगा..

कुछ लोग शायद इसे प्रवाहित कर देंगे और कुछ लोग.. पेड़ के

नीचे रख देंगे..?? 

विनम्र निवेदन उन कुछ लोगों से जो इन मूर्तियो की जिसकी

साल भर पूजा की..अपने लिए बहुत कुछ माँगा भी होगा अब

उन्हें ऐसे ही किसी पेड़ के नीचे रख देंगे .(यह उसी तरह होगा

जैसे माँ बाप जब बुड्ढे हो जाते हैं तब उन्हें आश्रम भेज दिया

जाए) ऐसा न करें।

ऐसा कदापि न करें । बल्कि,एक टब पानी में थोड़ा गंगाजल

डाल कर मूर्ति को उसमें रख दें।

एक-दो दिन में मूर्ति स्वतः उस में घुल जायेगी। मूर्ति घुले जल

को किसी गमले या पेड़ की जड़ में डाल सकते हैं ।

आपका यह प्रयास  मूर्ति का सम्मानजनक विसर्जन तो होगा

ही.. नदियों को स्वच्छ रखने को उठाया गया सार्थक पहला

कदम भी होगा..!  लोग हमारे धर्म का मजाक भी नही बनायेगे


उम्मीद है आप लोग इस तरह का कार्य न खुद करेंगे व दूसरों

को भी ऐसा करने से रोकेंगे ।

सहयोग की अपेक्षा के साथ!


 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

☝ अस्तित्व ये कैसा जहाँ नित नारी खोती आबरू है,

हैवानियत जागती है, इंसानियत आंखें बंद सोती है...!
दिल में अरमान होंसले बुलंद,फिर भी अधूरे रह गये,
सपने अपने जो संजोती नारी आंसू बनकर बह गये...!
बाहर भीतर घर आंगन सुरक्षित नहीं कहीं नंही कली,
पापियों की नगरी देखअब तो भारत माता भी है रोती...!
बचाये रखती कोख़ जन्म के बाद हवस से न बच पाती,
नित नये झूंठ,छलावे इंसानियत के नारी न समझ पाई...!
अपनों ने ही लुटा औरों में बांटा,छुपकर घात किया,
लज्जा नारी लुटाती, उसके बाद जान से मार दिया...!
हवस के पुजारी नारी में धर्म जाती कुछ न देखते हैं,
संरक्षक निर्लज अधिकारी तो सबसे पहले नोचते हैं...!
अस्तित्व जगजननी का मिटा दोगे नारी धरा की धार,
मनु का बीज भी नारी ही बोती,नारी जीवन का सार...!
मनु सभी बेशर्म हो गए,परमात्मा का भी ख़ौफ़ नहीं,
दरिंदे बेफिक्र हो घूमते,पैसों में बिकती न्याय की पोथी...!
अनगिनत कलियों की कर दी हत्या सुधर जाओ अभी,
बंधन में न बंध पाओगे ए नर नारी न मिलेगी कभी...!
हाथ जो कहता राहुल नारी का वंश आगे न बढ़ पायेगा,
शर्म करो वहशी दरिदों श्रष्टि का चक्र भी रुक जाएगा...!❤

कीमत

 पायल हज़ारो रूपये में आती है पैरो में पहना देते हैं,

एक रूपये की बिंदिया आती है माथे पर सजा देते हैं।
कीमत मायने नहीं रखती उसका मान मायने रखता हैं,
किताब घर में गीता और कुरान आपस में नहीं लड़ते हैं।
जो लड़ते हैं वही इंसान लिखे पर अम्ल ही नहीं करते,
बेशक़ कड़वे लगें ज्ञान देने वाले मित्र मगर सच्चे होते हैं।
इतिहास गवाह है आज तक नमक में कीड़े नहीं पड़े हैं।
मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड ही जाया करते हैं,
मीठी तारीफ़ मीठी बातें करने वाले ही खंजर घोपतें हैं,
समझदर के लिये "इशारा" काफी,ज्यादा नहीं सोचते हैं।

एक अपील 🙏🏻🙏🏻

 एक विनम्र निवेदन:- दीपावली पर लगभग हर घर में श्री गणेश और लक्ष्मी जी की नई मूर्तियों की पूजा  होगी..  लेकिन,पुरानी मूर्ति का क्या होगा.. ? ...