बिटिया रानी

बिटिया रानी

आज सदी में भी बहुत से लोग बेटी को बोझ समझते हैं लेकिन बेटी मतलब एक प्यारी सी मुस्कान, बेटी मतलब पापा का गुमान,बेटी मतलब खिलखिलाता फुल, बेटी मतलब अपना भविष्य और क्या कहे बेटी मतलब क्या होती हैं। वो तो बस वाही जानता हैं जिसे बेटी होती हैं। आज हम अपनी देश की सारी बेटियों के लिए कुछ पंक्ति लिख रहे हैं।ताकि हर किसी को बेटियों का महत्व पता चले।

बेटी की प्यार को कभी आजमाना नहीं,
वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं,
पिता का तो गुमान होती है बेटी,
जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी,

उसकी आंखें कभी नम न होने देना,
उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना ,
उन्गली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने,
फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने,

बहुत छोटा सा सफ़र होता है बेटी के साथ,
बहुत कम वक्त के लिये वह होती हमारे पास…!!
असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी,
समझो भगवान् का आशीर्वाद है बेटी
धन्यवाद!


आपका दोस्त- राहुल पाल

बेटी पराया धन

बेटी को पराया धन क्यों कहा जाता है।

बेटियां घर की रौनक होती हैं और माता-पिता के दिल के बेहद करीब भी होती हैं। उस पर भी जब मेरे जैसे लड़के के घर बेटी का जन्म हो और वो इस रिश्ते को शब्दों में ना ढाले, यह असंभव है इसलिए पेश हैं सभी  बेटियों पर लिखे चुनिंदा शेर जिनमें शायरियों के माध्यम से अपने जज़्बातों का इज़हार किया है।

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं

उड़के एक रोज़ बड़ी दूर चली जाती हैं
करके इस नरम दिल को पत्थर
बेटियां अपने ससुराल चली जाती  हैं

ऐसा लगता है कि जैसे ख़त्म मेला हो गया
उड़ गईं आँगन से चिड़ियाँ घर अकेला हो गया

जब ससुराल से मायके आ के बेटी मुस्कुराती है
तो माँ-बाप के जान में जान आती है।


घरों में यूँ सयानी बेटियाँ बेचैन रहती हैं
कि जैसे साहिलों पर कश्तियाँ बेचैन रहती हैं

मेरी बेटी से...
ये चिड़िया भी मेरी बेटी से कितनी मिलती जुलती है
कहीं भी शाख़े- गुल देखे तो झूला डाल देती है

हे भगवान तू अगर बेटियाँ नहीं लिखता
तो समझ घर में खिड़कियाँ नहीं लिखता


घर में जब बेटियाँ नहीं होंगी
तो समझो
पेड़ पर टहनियाँ नहीं होंगी


और अब बेटियो के बारे में लफ़्ज़ों में क्या बयाँ करूँ बस ये समझ लो बेटिया घर की लक्ष्मी है। हे भगवान बेटियाँ भी उन्हें ही देना जिसे इन्हें पालने की औकात हो। बगैर बेटियों के घर जैसे काटने को दौड़ता है, ना जाने वो कौन लोग होते हैं जिन्हें बेटियोँ से नफरत है आखिर क्यों।
हे भगवान मुझे इतना काबिल बनाना की मेरे लफ्ज़ से मेरी या किसीकी बहनों को बुरा ना लगे और मैं हर उस लड़की की भी इज़्ज़त कर सकूँ जिस बहन को भाई नसीब नही है , और उसका भाई बनके उसको बहन स्वीकारने की क्षमता देना।

आपका दोस्त-  राहुल पाल

गरीब vs अमीर

गरीब vs अमीर

  • ●जो गरीबी में एक दिया भी न जला सका
    एक अमीर का पटाखा उसका घर जला गया


    ●अमीर की बेटी पार्लर में जितना दे आती है
    उतने में गरीब की बेटी अपने ससुराल चली जाती है


    ●मैं कड़ी धूप में चलता हूँ इस यकींन के साथ
    मैं जलूँगा तो मेरे घर में उजाले होंगे


    ●जरा सी आहट पर जाग जाता है वो रातो को
    ऐ खुदा गरीब को बेटी दे तो दरवाज़ा भी दे



    ●तहजीब की मिसाल गरीबों के घर पे है
    दुपट्टा फटा हुआ है मगर उनके सर पे है


    ●चेहरा बता रहा था के मारा है भूख ने
    सब कह रहे थे के कुछ खा के मर गया

    ●जब भी देखता हूँ किसी गरीब को हँसते हुए
    तो यकीन आ जाता है
    की खुशियो का ताल्लुक दौलत से नहीं होता


    ●गरीबों के बच्चे भी खाना खा सके त्योहारों में
    तभी तो भगवान खुद बिक जाते हैं बाजारों में


    ●शाम को थक कर टूटे झोपड़े में सो जाता है
       वो मजदूर, जो शहर में ऊंची इमारतें बनाता है।



एक अपील 🙏🏻🙏🏻

 एक विनम्र निवेदन:- दीपावली पर लगभग हर घर में श्री गणेश और लक्ष्मी जी की नई मूर्तियों की पूजा  होगी..  लेकिन,पुरानी मूर्ति का क्या होगा.. ? ...