बेटी को पराया धन क्यों कहा जाता है।
बेटियां घर की रौनक होती हैं और माता-पिता के दिल के बेहद करीब भी होती हैं। उस पर भी जब मेरे जैसे लड़के के घर बेटी का जन्म हो और वो इस रिश्ते को शब्दों में ना ढाले, यह असंभव है इसलिए पेश हैं सभी बेटियों पर लिखे चुनिंदा शेर जिनमें शायरियों के माध्यम से अपने जज़्बातों का इज़हार किया है।
घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं
उड़के एक रोज़ बड़ी दूर चली जाती हैं
करके इस नरम दिल को पत्थर
बेटियां अपने ससुराल चली जाती हैं
ऐसा लगता है कि जैसे ख़त्म मेला हो गया
उड़ गईं आँगन से चिड़ियाँ घर अकेला हो गया
जब ससुराल से मायके आ के बेटी मुस्कुराती है
तो माँ-बाप के जान में जान आती है।
घरों में यूँ सयानी बेटियाँ बेचैन रहती हैं
कि जैसे साहिलों पर कश्तियाँ बेचैन रहती हैं
मेरी बेटी से...
ये चिड़िया भी मेरी बेटी से कितनी मिलती जुलती है
कहीं भी शाख़े- गुल देखे तो झूला डाल देती है
हे भगवान तू अगर बेटियाँ नहीं लिखता
तो समझ घर में खिड़कियाँ नहीं लिखता
घर में जब बेटियाँ नहीं होंगी
तो समझो
पेड़ पर टहनियाँ नहीं होंगी
और अब बेटियो के बारे में लफ़्ज़ों में क्या बयाँ करूँ बस ये समझ लो बेटिया घर की लक्ष्मी है। हे भगवान बेटियाँ भी उन्हें ही देना जिसे इन्हें पालने की औकात हो। बगैर बेटियों के घर जैसे काटने को दौड़ता है, ना जाने वो कौन लोग होते हैं जिन्हें बेटियोँ से नफरत है आखिर क्यों।
हे भगवान मुझे इतना काबिल बनाना की मेरे लफ्ज़ से मेरी या किसीकी बहनों को बुरा ना लगे और मैं हर उस लड़की की भी इज़्ज़त कर सकूँ जिस बहन को भाई नसीब नही है , और उसका भाई बनके उसको बहन स्वीकारने की क्षमता देना।
आपका दोस्त- राहुल पाल
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