बचपन

बचपन भी कमाल का था
खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें
या ज़मीन पर
आँख बिस्तर पर ही खुलती थी !!

मंदिर

एक लड़की ने लड़के से कहा तुम मेरे
लिए क्या कर सकते हो
लड़का मैं तुम्हारे लिये सब कुछ कर
सकता हूँ
तब लड़की ने कहा
तो फिर अपने माता-पिता को छोड़ दो
लड़का कहा माफ़ करना मैं मंदिर नया बना
लूंगा लेकिन भगवान नहीं बदल सकता
मुझे छाओं में रखा, खुद जलता रहा धुप में, मैंने देखा है, एक फरिश्‍ता मेरे पिता के रूप में!!
हे भगवान! बस इतना काबिल बनाना मुझे की जिस तरह मेरे माँ-बाप ने मुझे खुश रखा, मैं भी उनके बुढ़ापे में उनको खुश रख सकूँ
अगर खुदा की जन्नत को
दुनिया में देखना चाहते हो तो
एक बार अपनी मांँ की गोद में
सोकर देखना
जब मां छोड़कर जाती है
तब दुनिया में कोई दुआ देने वाला नहीं होता
और जब पिता छोड़कर जाता है
तब कोई हौसला देने वाला नहीं होता
किसी के घर जाओ तो अपनी “आंखो” को इतना काबू में रखो कि उसके “सत्कार” के अलावा उसकी “कमियाँ” न दिखे और जब उसके घर से निकलो तो अपनी “ज़ुबान” काबू में रखो ताकि उसके घर की “इज़्ज़त” और “राज़” दोनो सलामत रहे।   - राहुल पाल

एक अपील 🙏🏻🙏🏻

 एक विनम्र निवेदन:- दीपावली पर लगभग हर घर में श्री गणेश और लक्ष्मी जी की नई मूर्तियों की पूजा  होगी..  लेकिन,पुरानी मूर्ति का क्या होगा.. ? ...